शनिवार, 6 नवम्बर 2010

विचार-३९ :: शिक्षा का अधिकार

शिक्षा का अधिकार

“शिक्षित मनुष्य अशिक्षित मनुष्यों से उतने ही श्रेष्ठ हैं जितने जीवित मनुष्य मृतकों से।”

--- अरस्तू

“शिक्षा का सबसे बड़ा उद्देश्य आत्मनिर्भर बनाना है।”

--- सेमुअल स्माइल्स

ये थे कुछ विद्वान-चिंतकों के विचार। इसमें असहमति की शायद ही कुछ गुंजाइश हो। पर ज़रा आंकड़ो के आइने में वस्तुस्थिति देखिए। संयुक्त राष्ट्र द्वारा ज़ारी “एजुकेशन फ़ॉर ऑल ग्लोबल मॉनिटरिंग रिपोर्ट” में कहा गया है कि

  1. दुनिया में कुल अशिक्षित लोगों की संख्या ७५.९० करोड़ है जिसमें सबसे ज़्यादा भारत में है।
  2. दुनिया भर के अशिक्षितों में हमारी भागीदारी लगभग ३५ % है।
  3. हमारे देश में कुल ३८ करोड़ लोग ऐसे हैं जो लिख पढ नहीं सकते।
  4. यह १९४७ की हमारी कुल आबादी से भी अधिक है।
  5. तक़रीबन ७.२ करोड़ बच्चे और ७.१ करोड़ किशोर स्कूल से वंचित हैं।

१ अप्रैल २०१० से देश में सभी बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकार बन गया है। पता नहीं इन कामों के शुभारंभ के लिए १ अपैल ही क्यों अच्छा दिन माना जाता है!

गोपाल कृष्ण गोखले ने लगभग १०० साल पहले इस बात की मांग रखी थी कि शिक्षा भारतीय बच्चों के लिए मौलिक अधिकार हो। यह मिलने में एक शताब्दी लग गया!

ब्रिटेन ने ऐसा क़ानून १८७० में ही बना लिया था।

इस अधिनियम के तहत ६-१४ साल के बच्चों को यह अधिकार दिया जाएगा। आंकड़े कहते हैं कि हमारे देश के ६-१४ साल के २०० मिलियन बच्चों में से आधे से ज़्यादा अपनी आठ साल की प्राथमिक शिक्षा भी पूरी नहीं कर पाते। अब ये ... 

  • आठवीं कक्षा तक नि:शुल्क शिक्षा पाएंगे। 
  • पहुंच के भीतर वाला कोई निकटवर्ती स्कूल किसी भी बच्चे को प्रवेश देने से इनकार नहीं करेगा। 
  • प्रत्येक ४० छात्रों पर एक सुयोग्य शिक्षक की तैनाती कर दी जाएगी। 
  • ५ वर्ष के भीतर सभी शिक्षक प्रशिक्षित कर दिए जाएंगे। 
  • ३ वर्ष के भीतर खेल का मैदान, पुस्तकालय, अध्ययन कक्ष, शौचालय, पेयजल जैसी समुचित सुविधाएं सुनिश्चित कर दी जाएगी। 
  • निजी स्कूल में भी सबसे निचली कक्षा में समाज के सबसे ग़रीब और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के लिए २५ प्रतिशत सीटें आरक्षित कर दी जाएगी। 
  • शारीरिक दंड नहीं दिया जाएगा। 
  • दाखिले के समय कोई टेस्ट नहीं लिया जाएगा।

<(कहीं हम सपना तो नहीं देख रहे!!)>

सवाल यह है कि ६ से १४ ही क्यों यह ० से १८ साल तक क्यों नहीं रखा गया? संयुक्त राष्ट्र की बाल अधिकार संधि में १८ वर्ष से कम आयु वालों को बच्चा माना गया है। भारत ने इस संधि पर हस्ताक्षर किया है।

>> यह प्रावधान ० से ६ तथा १४ से १८ साल के बच्चों को इस अधिकार से वंचित करता है।<< 

  • क्या इसमें आवश्यक संशोधन नहीं किया जाना चाहिए? 

  • गुणवत्तायुक्त शिक्षा की बात हम कब करना शुरु करेंगे? 

  • आज़ादी के ६२ साल बाद भी देश की एक-तिहाई जनसंख्या निरक्षर है, इसके बाद भी हम कह सकते हैं कि हम विकसित देश हैं?

आपका क्या कहना है?

4 टिप्‍पणियां:

  1. आज के समय में शिक्षा के अधिकार की बात जायज होते हुए भी शिक्षा की गुणवत्ता की समस्या सबसे अधिक सोचनीय है
    सार्थक आलेख के लिये साधुवाद

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  2. सम्पूर्ण शिक्षा पूर्णतः निःशुल्क होनी चाहिए। इन बच्चों में शिक्षा की लौ जलाने की ज़रूरत से जोड़ते हुए आपने यदि यह आलेख कल दीपावली को प्रकाशित किया होता,तो विशेष ध्यानाकर्षण होता।

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  3. सवाल यह है कि ६ से १४ ही क्यों यह ० से १८ साल तक क्यों नहीं रखा गया? संयुक्त राष्ट्र की बाल अधिकार संधि में १८ वर्ष से कम आयु वालों को बच्चा माना गया है। भारत ने इस संधि पर हस्ताक्षर किया है

    सार्थक विचार .....

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  4. यथार्थपरक, सामयिक और विचारोत्तेजक आलेख. आभार
    सादर,
    डोरोथी.

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