पहली नज़र में प्यार!
- क्रिस्टोफ़र मार्लो ने ‘हीरो एंड लीडर’ में कहा है,
- “Who ever loved, that loved not at first sight?” अर्थात् क्या कभी किसी ने प्यार किया है जिसने पहली नज़र में प्यार नहीं किया?
- “पहली नज़र में प्यार!”
- यह जुमला बहुत सुना है। आपने भी सुना होगा ... ‘Love at first sight!’ सुनने में अच्छा भी लगता है। पर यह होता किससे है? किसी साधारण ... सामान्य-सी दिखने वाली महिला से? नहीं।
- सुंदर महिलाओं को देखा नहीं कि दिल दे बैठते हैं पुरुष। उनको Love at first sight हो जाता है। आख़िर यह दिल का मुआमला है भाई। आंख से भाई, दिल तक आई।
- ऐसे लोगों के लिए ‘शारब’ का यह शे’र बिल्कुल सटीक बैठता है, -
“आगाज़े मुहब्बत क्या कहने,
नज़रों का है सब खेल मगर,
आंखों को ख़बर होती ही नहीं
और दिल को ख़बर हो जाती है।”
- यह कोई नई बला नहीं है। प्राचीन काल से इसके अनेकों उदाहरण मिलते हैं। सुंदर महिलाओं पर मोहित हो जाने का यह जीन कमोबेश सभी पुरुषों में मौज़ूद है।
- पर कभी सोचा है, महिलाएं क्या चाहती हैं?
- एक अध्ययन में यह पाया गया है कि पहली नज़र में कोई ख़ूबसूरत व्यक्ति आए तो महिलाएं यह निर्णय नहीं ले पातीं कि यह उसका अच्छा साथी होगा या नहीं।
- यह अध्ययन आज बताता हो यह बात, पर रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने तो वर्षों पहले ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ में कह दिया था कह दिया था, --
“खोजता पुरुष सौंदर्य, स्त्रियां प्रतिभा को,
नारी चरित्र बल को, नर मात्र त्वचा को।”
- इसीलिए पहली नज़र में कोई ख़ूबसूरत व्यक्ति आए तो महिलाएं काफ़ी सोच विचार करती हैं। उनके अंदर विचारों का द्वन्द्व चलता है। कई सवाल उठते हैं... जैसे ...
- क्या यह पुरुष प्रतिबद्ध है?
- उसका व्यक्तित्व कैसा है?
- क्या वह अपनी ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम है?
- क्या वह मेरी ज़रूरतों को पूरा कर पाएगा?
- मतलब उन्हें Love at first sight नहीं होता!
- ऐसा क्यों होता है?
- शायद ‘डोन जुयान’ में बायरन द्वारा कही गई इस बात में इसका उत्तर हो –
- “पुरुष का प्रेम उसके जीवन की एक वस्तु है, एक भाग है, परन्तु नारी के लिए उसका प्रेम उसका सम्पूर्ण जीवन है!”

आपका क्या विचार है?
संस्कारित महिलाओं की नज़र में प्यार का मतलब "उसका प्रेम उसका सम्पूर्ण जीवन" हो सकता है,परन्तु आज बेशुमार अधनंगी औरतें जो सड़कों पर और T.V.पर नज़र आती हैं,क्या उनकी नज़र में भी प्यार का यही मतलब है ? मेरा मन यह मानने में न-नुकुर कर रहा है
प्रत्युत्तर देंहटाएं“पुरुष का प्रेम उसके जीवन की एक वस्तु है, एक भाग है, परन्तु नारी के लिए उसका प्रेम उसका सम्पूर्ण जीवन है!” इस कथन में कुछ संशोधन करना चाहती हूँ कि पुरु
प्रत्युत्तर देंहटाएंष का प्रेम केवल भोग है परन्तु नारी के लिए सम्पूर्ण जीवन। वैसे आज प्रेम की परिभाषा ही बदल गयी है। जीवन साथी के चयन के रूप में प्रेम को लिया जाता था पूर्व में लेकिन अब तो पुरुष की तरह महिला को भी भोग की तरह ही लेना आ गया है। अब तो यूज एण्ड थ्रो का सिद्धान्त है भाई।
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प्रत्युत्तर देंहटाएं"Love is blind " and men are never blind.
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अजित जी और कुंवर जी आप दोनों से असहमति की गुंजाइश ही नहीं है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंज़ील जी आपके निहितार्थ समझ नहीं पाया।
प्यार क्या अंधा होगा?
करने वाले हो सकते हैं।
और आदमी .... पता नहीं। अगर यह व्यंग्य है तो फिर ठीक है।
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प्रत्युत्तर देंहटाएंमनोज जी, कोई व्यंग नहीं है। आपसे अक्षर्तः सहमत हूँ।
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प्रेम शाश्वत है, सत्य है ! इसकी अपनी गरिमा है ! मूल रूप से जीवन को जीवंत रखने का जीवन रस है ! फिल्मों, टीवी और फैशन की दुनिया में जो प्रेम परोसा जा रहा है वह प्रेम नहीं बल्कि सस्ती पब्लिसिटी पाने का मार्ग है ! प्रेम का विकृत रूप है ! स्त्री और पुरुष दोनों के लिए ही प्रेम परमावश्यक है . यदि नारी प्रेम करने से पहले सोच विचार करती है तो उसमें कुछ भी असहज नहीं है परन्तु पुरुष बिना सोचे विचारे प्रेम करते हैं यह कहना भी सही नहीं होगा . सर्वविदित है कि पहली नजर का प्यार सिर्फ अस्थायी आकर्षण होता है ! स्थायित्व के लिए उस पर विचार करना अवश्यम्भावी हो जाता है. प्रेम की विस्तृत व्याख्या पढने को मिली . शुभकामना .
प्रत्युत्तर देंहटाएंचमड़ी और दमड़ी के इस द्वंद्व में,प्रेम कहीं गुम हो गया लगता है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंकाफी हद तक यही केमिस्ट्री होती है स्त्री और पुरुष के मनोभावों की. लेकिन अपवाद तो हर जगह है...और्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र बढते ही जा रहे हैं. :)
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