शनिवार, 20 नवम्बर 2010

विचार-६७ :: शिक्षा

विचार-६७

"एक अच्छा विचार, हमें फ़िज़ूल के श्रम से बचाता है!"

शिक्षा

  • अशोक के फूल में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कहा है, ‘शिक्षा का मुख्य साधन उत्तम गुरु है’।
  • “अध्यापक को मात्र अच्छी तरह अध्यापन करके ही संतुष्ट नहीं हो जाना चाहिए, उसे अपने छात्रों का स्नेह और आदर अर्जित करना चाहिए”। -- सर्वपल्ली राधाकृष्णन
  • क्या शिक्षा मात्र जानकारी देना है? ठीक है कि जानकारी का महत्व है। ठीक है कि आज के युग में तकनीकी जानकारी बहुत ही महत्वपूर्ण है। लेकिन साथ ही बौद्धिक रुझान और लोकतांत्रिक भावना, जैसे करुणा, प्रेम आदि श्रेष्ठ भावना, भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये व्यक्ति को उत्तरदायी नागरिक बनाते हैं।
  • प्रेमचंद ने कर्मभूमि में कहा है,
    • जीवन को सफल बनाने के लिए शिक्षा की ज़रूरत है, डिग्री की नहीं। हमारी डिग्री है – हमारा सेवा भाव, हमारी नम्रता, हमारे जीवन की सरलता। अगर यह डिग्री नहीं मिली, अगर हमारी आत्मा जागृत नहीं हुई, तो काग़ज़ की डिग्री व्यर्थ है’।
  • शिक्षा का लक्ष्य है ज्ञान के प्रति समर्पण की भावना और हमेशा सीखते रहने की प्रवृत्ति। यह प्रवृत्ति अगर बनी रहती है तो यह व्यक्ति को ज्ञान के साथ-साथ कौशल भी प्रदान करती है।
  • मन और शरीर का, चरित्र के भावों का परिष्कार हो, शिक्षा का यही प्रयोजन है।
  • अकबर इलाहाबादी के शब्दों में कहें तो,

हम ऐसी कुल किताबें क़ाबिले ज़ब्ती समझते हैं

कि जिनको पढके लड़के बाप को खब्ती समझते हैं।

  • लोकमान्य तिलक ने कहा था,

आजकल शिक्षा तो रोटी कमाने का एक धंघा-सा हो बैठी है। यह शिक्षा नहीं, मज़दूरी है’।

  • शिक्षा ‘जीवन’ के लिए है, ‘जीविका’ के लिए नहीं।
  • इससे स्पष्ट है कि दो प्रकार की शिक्षाएं हैं। एक तो हमें यह बताती है कि जीवन निर्वाह कैसे हो और दूसरी यह कि जीवन यापन कैसे किया जाए।
  • शिक्षक को अध्यापन एक मिशन के रूप में अपनाना चाहिए।
  • शिक्षक को शिक्षा के प्रति समर्पित और प्रतिबद्ध होना चाहिए। तभी हम एक अच्छी शिक्षा की कल्पना कर सकते हैं। शिक्षक स्नेह, आदर और सम्मन तभी अर्जित कर पाएंगे।
  • रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने कहा था,

‘श्रेष्ठ शिक्षा वह नहीं जो केवल जानकारी दे। सच्ची शिक्षा वह है जो हमारे जीवन और वातावरण में सामंजस्य स्थापित करे’।

  • वास्तविक शिक्षा का उद्देश्य मन को नियंत्रित करना, अहंकार नष्ट करना, दैवी गुणों का संवर्धन करना और ब्रह्म ज्ञान को प्राप्त करना होता है।
  • अच्छी और सही शिक्षा से समाज की अनेक बुराइयों से निपटा जा सकता है।
  • सही शिक्षा से
    • सतत प्रवाहमान जीवन का विकास संभव है।
    • अंध-विश्वास, रूढियों से मुक्ति संभव है।
    • बौद्धिक विकास, आध्यात्मिक उन्नति संभव है।
    • धनी और निर्धन के बीच दूरी पाटना संभव है।
    • समाज में शांति, समृद्धि, सद्भावना, समता लाना संभव है।
  • शिक्षा का केन्द्रीय उद्देश्य तो ज्ञान की प्राप्ति है।
    • ज्ञान शक्ति है।
    • इसके द्वारा नैतिक, चारित्रिक और भौतिक उत्थान संभव है।
  • महात्मा गांधी ने कहा था,

‘सच्ची शिक्षा तो वह है जिसके द्वारा हम अपने को, आत्मा को, ईश्वर को, सत्य को पहचान सकें’।

आपका क्या विचार है?

19 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर विचारों का संकलन. धन्यवाद.

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  2. भूषण जी, प्रोत्साहन के लिए आभार। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
    फ़ुरसत में .... सामा-चकेवा
    विचार-शिक्षा

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  3. ढाई अक्षर जीवन में उतरा हो,शिक्षा तभी सार्थक।

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  4. राधारमण जी बात तो आपने सही कही है कि ढाई आखर प्रेम का पढै सो पंडित होए।

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  5. एकदम बढ़िया पोस्ट,अकबर इलाहाबादी का शेर मौज़ू और बहुत प्यारा. मेरा एक दोहा है:-

    शिक्षा ही कर पाएगी,मन के तम को दूर,
    लाखों बाधाएं पड़ें , पढ़िए मगर ज़रूर.

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  6. कुंवर जी आपके विचार हमेशा पोस्ट के अधूरेपन को दूर कर देते हैं। आभार आपका।

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  7. #
    शिक्षा का लक्ष्य है ज्ञान के प्रति समर्पण की भावना और हमेशा सीखते रहने की प्रवृत्ति। यह प्रवृत्ति अगर बनी रहती है तो यह व्यक्ति को ज्ञान के साथ-साथ कौशल भी प्रदान करती है।
    #
    मन और शरीर का, चरित्र के भावों का परिष्कार हो, शिक्षा का यही प्रयोजन है।

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    एक एक लव्ज़ से सहमत हूँ...बेहद उम्दा लेख के लिए आभार।

    .

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  8. ज़ील जी आपके विचार हमारा मनोबल बढाते हैं।

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  9. शिक्षा पर आपके विचार सटीक, सार्थक और शिक्षाप्रद हैं। आभार।

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  10. तुलसीदासजी ने भी कहा है कि कलयुग में पिता अपने बच्चो को वही शिक्षा देंगे जिससे पेट भर सके......
    जबकि शिक्षा का असली उद्देश्य तो हर बंधन से ऊपर उठ्जना है......
    बढिया...
    http://swarnakshar.blogspot.com/
    राजेश

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  11. जीवन के उत्थान के साथ जीवन यापन भी तो ज़रूरी है ...आज की शिक्षा केवल जीवन यापन पर जोर देती है ....इसीलिए इतनी विसंगतियाँ दिखती हैं समाज में ...सही शिक्षा में कही बातों से सहमत हूँ ...

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  12. सर्वांगीण विकास ही शिक्षा का लक्ष्य होना चाहिए ....

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  13. राजेश जी आपके विचार और तुलसी दास की उक्ति ने हमारा ज्ञानवर्धन किया।

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  14. संगीता जी
    आपकी प्रेरक बातें ग्रहण करने योग्य हैं।

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