रविवार, 19 जून 2011

प्रवासी पक्षी द्वारा तय किए जाने वाली दूरी

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पक्षियों की प्रवास यात्रा बहुत ही खास मकसद से होती है और उद्देश्यपूर्ण भी। जब कोई काम किसी ख़ास मकसद से हो तो रास्ते की बड़ी-बड़ी बाधाएं भी पार कर लेने का जज़्बा होता है। पक्षियों के साथ भी ऐसा ही होता है। हजारों किलोमीटर तक कई पक्षी बिना बिना रुके लगातार लगातार उड़ते चले जाते हैं। रास्ते में मिलने वाले आंधी, तूफान, भारी वर्षा, ठंडी हवा के झोंके का ये बड़ी खूबी से सामना करते हैं।

अबाबील, मार्टिन और कुछ शिकारी पक्षी प्रवास-यात्रा के दौरान कुछ नहीं खाते। दरअसल ये पूरी प्रवास-यात्रा के दौरान रुकते ही नहीं। बिना रुके ये 350 से 600 कि.मी. तक की उड़ान भर लेते हैं। उत्तर अमरीका के पक्षी दक्षिण की ओर जाते समय मैक्सिको की खाड़ी के ऊपर 800 से 1,000 कि.मी. तक लगातार उड़ते रहते हैं। न्यूज़ीलैंड में सर्दी बिताने वाले पक्षी 1,000 से 1,500 कि.मी. लगातार बिना रुके उड़ान भरकर आते हैं। बिना रुके लंबी उड़ान भरने में सबसे अधिक दूरी अलास्का से पवनई द्वीप की 3,300 कि.मी. की दूरी गोल्डन प्लोवर तय करता है।

अपनी प्रवासीय यात्रा के दौरान ये पक्षी कितनी दूरी तय करते हैं यह उनकी स्थानीय परिस्थिति एवं प्रजाति के ऊपर निर्भर करता है। इनके द्वारा तय की गई यात्रा की दूरी मापने के लिए पक्षी विज्ञानी इन्हें बैंड लगा देते हैं या फिर इनके ऊपर रिंग लगा देते हैं। फिर जहां वे पहुंचते हैं, उसका उन्हें अंदाज़ा हो जाता है। और तब दूरी माप ली जाती है।

आर्कटिक क्षेत्र के कुररी (टर्न) पक्षी को सबसे ज़्यादा दूरी तय करने वाला पक्षी माना जाता है। लेबराडोर की तटों से ये ग्यारह हज़ार मील की दूरी तय कर अन्टार्कटिका में जाड़े के मौसम में पहुंचते हैं। इतनी ही दूरी तय कर गर्मी में ये वापस लौट जाते हैं। इस प्रकार देखें तो आर्कटिक टर्न (स्टेर्ना पैराडिसेया) साल भर में 35,000 कि.मी. से अधिक लंबी यात्रा करता है।

इसी तरह की मराथन उड़ान भरने वाली अन्य प्रजातियां हैं सुनहरी बटान, टिटिहरी (सैंड पाइपर) एवं अबाबील। ये आर्कटिक क्षेत्र से अर्जेन्टिना तक की छह से नौ हज़ार मील की दूरी तय करते हैं। यूरोप के गबर (व्हाइट स्टौर्क) जाड़ों में आठ हज़ार माल की दूरी तय कर दक्षिण अफ्रीका पहुंच जाते हैं।

साइबेरियाई सारस (गुस ल्यूकोजेरेनस) हर साल 5,000 कि.मी. की यात्रा करके रूस से केवला देव राष्ट्रीय पक्षी विहार, भरतपुर, राजस्थान में आते हैं। छोटा पनलोव्वा या रूनी (लिटिल स्टिंट) (कालिड्रिस माइन्यूटा) हर साल 10,000 कि.मी. की यात्रा करती है।

इसमें कोई शक नहीं कि प्रवासी पक्षियों में ज़बरदस्त दमखम होता हागा, नहीं तो इतनी दूरी तय करना कोई आसान बात नहीं है। इस जगत में इनसे ज़्यादा एथलीट शायद ही कोई जीव होगा। प्रवासी यात्रा आरंभ करने के पहले ये पक्षी अपने अंदर काफी वसा एकत्र कर लेते हैं जो उनकी उड़ान वाली यात्रा के दौरान इंधन का काम करते हैं।

22 टिप्‍पणियां:

  1. आपने बिल्कुल सही कहा है-
    इस जगत में इनसे ज़्यादा एथलीट शायद ही कोई जीव होगा।
    पक्षियों की जीवनचर्या पर कभी-कभी ईर्ष्या होती है।
    इस धारावाहिक से अनोखी जानकारियां प्राप्त हो रही हैं।
    आभार, मनोज जी ।

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  2. आपकी यह प्रवासी पंछी की श्रंखला मुझे बहुत ही पसंद आती है.

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  3. इसमें कोई शक नहीं कि प्रवासी पक्षियों में ज़बरदस्त दमखम होता हागा, नहीं तो इतनी दूरी तय करना कोई आसान बात नहीं है। इस जगत में इनसे ज़्यादा एथलीट शायद ही कोई जीव होगा।
    sunder jaankari se bhari gyanvardhak post.

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  4. एथलीट शब्द इन लम्बी उड़ान वाले पक्षियों के लिए बहुत सही इस्तेमाल किया है आपने.इंतनी लम्बी उड़ान पढ़कर मैं तो दंग रह गया.

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  5. आपकी पोस्ट बहुत अच्छी लगी।
    --
    पितृ-दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

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  6. बहुत सुन्दर जानकारी..पक्षियों की रोचक दनिया के तथ्य जान कर अच्छा लगा

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  7. पक्षियों के बारे में विस्तृत जानकारी देता लेख ... इस श्रृंखला से काफी कुछ बातें पता चलीं ...आभार

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  8. तथ्यात्मक जानकारी देने के लिए आभार.....

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  9. ग्यान वर्द्धक और उपयोगी लेख...धन्यवाद एवं बधाई

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  10. जानकारीपूर्ण उपयोगी लेख .
    शीर्षक के अक्षरों का स्टाईल बहुत सुन्दर है.

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  11. सरल और बोधगम्य जानकारी बच्चे और बड़े सभी के लिए महत्वपूर्ण

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  12. एकाग्रता और लक्ष्य की और बढ़ते चले जाने की सीख देते हैं ये पक्षी ...
    अद्भुत है पक्षियों का यह संसार भी ...

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  13. सच में कई बार इरशा होती है ऐसे पंछियों को देख कर ... काश हमारे भी पर होते और इतना उड़ पाते ...
    बहुत ही महत्वपूर्ण और सारगर्भित जानकारी दी है आपने ... शुक्रिया ...

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  14. बहुत ही अच्छा पोस्ट है आपका !मेरे ब्लॉग पर आ कर मेरा होंसला बढाए !
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  15. पक्षियों के इन मैराथन प्रवासों पर विस्तृत जानकारी का आभार.

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  16. kafi kuchh naya janNe ko milta hai apke har aalekh se. lekin pakshiyon ka lekh padh man ek baar ko to jaroor ek ichha batane lagta hai....kash me panchhi hoti.

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  17. वाह...बेहतरीन श्रृंखला है आपकी प्रवासी पक्षियों विषयक....जानकारीपूर्ण. आभार.

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  18. वाह ... बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

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